Getting My Affirmation To Work




उसने रोना-धोना शुरु किया और कहा, "ऐ दयामूर्ति!

और एक व्यक्ति अपने आवंटित समय में बहुत सी भूमिकायें अदा करता है...."

जब रानी को यह हाल मालूम हुआ कि पुत्र-वधू एक साधारण साधु की लड़की है, तो उसे बड़ा क्रोध आया। राजा से बोली, "तुमने अपनी प्रतिष्ठा का कुछ भी ख्याल न किया। राजा होकर साधु से रिश्ता जोड़ लिया!"

हजरत ईसा बोलो, "तेरा कहना सच है। परन्तु मैं एक मूर्ख मनुष्य से भाग रहा हूं।"

उन्हों दरवाजे बन्द करके दीवारों को रगड़ना शुरु किया और आकाश की तरह बिल्कुल और साफ सादा घाटा कर डाला। उधर चीनी अपना काम पूरा करके खुशी के कारण उछलने लगे।

हजरत लुकमान ने जवाब दिया, "मैंने आपके हाथ से इतने स्वादिष्ट भोजन खाये हैं कि लज्जा के कारण मेरा सिर नीचे झुका जाता है। इसीसे मेरे दिल ने यह गवारा नहीं किया कि कड़वी चीज आपके हाथ से न खाऊं। मैं केवल कड़वेपन पर शोर मचाने लगूं तो सौ रास्तों की खाक मेरे बदन पर पड़े। ऐ मेरे स्वामी, आपके सदैव शक्कर प्रदान करने वाले हाथ ने इस खरबूजे में कड़वाहट कहां छोड़ी थी कि मैं इसकी शिकायत करता!" १

" इस तरह वह लड़का कब्र का हाल बयान करता था और खून के आंसू उसकी आंखों से टपकते जाते थे। एक मसखरे ने ये शब्द सुनकर अपने आप से कहा, "पिताजी! भगवान् की कसम, मालूम होता है कि ये लोग इस लाश को हमारे घर ले जा रहे हैं।"

मौलाना मुहम्मद website जलालुद्दीन कृत 'मसनवी' फारसी साहित्य में अनूठा get more info ग्रन्थ है। संसार की सर्वोत्तम पुस्तकों में उसकी गणना की जाती है और दुनिया की प्राय: सभी जीवित भाषाओं में उसका अनुवाद हो चुका है। उसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी हुईं है कि फारसी-दां लोगों की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा घर मिले, जहां रूमी का यह ग्रंथ न हो।

[रूमियां की उपमा उन ईश्वर-भक्त सूफियों की-सी है, जिन्होंने न तो धार्मिक पुस्तकें पढ़ी और न किसी अन्य विद्या या कला में योग्यता प्राप्त की है। लेकिन लोभ, द्वेष, दुर्गुणों को दूर करके अपने हृदय को रगड़कर, इस तरह साफ कर लिया है कि उसके दिल स्वच्छ शीशें की तरह उज्जवल हो गये है।, जिनमें निराकार ईश्चरीय ज्योति का प्रतिबिम्ब स्पष्ट झलकता है।]१

ऐसी चिकनी-चुपड़ी बातों से इनको रिझाया और खुद डंडा लेकर सूफी check here के पीछे चला और उसे पकड़कर कहा, "क्यों रे सूफी, तू निर्लल्जता से बिना आज्ञा लिये लोगों के बाग में घुस आता है!

[संपादित करें] नाजुक प्रतिष्ठा "वो सिर्फ़ एक उम्र का नही था, बल्कि हर समय का था."

एक दिन उसने सिंहासन पर सोते हुए किसके कुछ शब्द और धमाधम होने की आवाज सुनी।

इस तरह की बातें करते-करते जब लोग हजरत जुन्नून के पास पहुंचे तो उन्होंने दूर से ही आवाज दी, "कौन हो? खबरदार, आगे न बढ़ना!"

एक साधु पहाड़ों पर रहा करता था। न उसके स्त्री थी और न बच्चे। वह एकान्तवास में ही मगन रहा करता था।

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